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सूर्य ग्रहण २०२२- जानें ग्रहण में क्या करें, क्या नहीं… (Surya Grahan 2022- Know Do's And Don'ts During Solar Eclipse)

09:02 AM Oct 25, 2022 IST | Usha Gupta
सूर्य ग्रहण २०२२  जानें ग्रहण में क्या करें  क्या नहीं…  surya grahan 2022  know do s and don ts during solar eclipse
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मंगलवार यानी आज २५ अक्टूबर को सूर्य ग्रहण है. इसके बारे में पंडित राजेंद्र जी विशेष जानकारी दे रहे हैं.
पूर्व भारत के कुछ भाग छोड़कर पूरे भारत में सूर्य ग्रहण रहेगा और इससे जुड़े नियमों का पालन करना हितकर होगा.
हिंदुस्तान के अतिरिक्त उत्तर मध्य अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया आदि क्षेत्र में सूर्यग्रहण दिखाई देगा.

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ग्रहण का समय काल, सूतक काल, भारत के विभिन्न स्थानों में ग्रहण का समय तथा ग्रहण में क्या करें, क्या नहीं के बारे में विस्तार से जानें.

सूर्य ग्रहण काल- 25 अक्टूबर शाम 4:30 से 6:06 तक
सूतक काल – 25 अक्टूबर प्रातः 4:30 से ग्रहण समाप्त होने तक

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नक्षत्र स्वाति राशि तुला में ग्रहण लगेगा…
मेष राशि स्त्रीकष्ट
वृषभ राशि शरीर रोग
मिथुन राशि चिंतन परिवारिक कष्ट
कर्क राशि व्यर्थ बीमारी
सिंह राशि विजय की प्राप्ति
कन्या राशि धन का क्षण होगा
तुला राशि शरीर घातक
वृश्चिक राशि धन का नाश
धनु राशि धन का सुख
मकर राशि सुख शांति
कुंभ राशि मानहानि
मीन राशि मृत्यु तुल्य कष्ट

यह भी पढ़ें: मंत्रों का सेहत पर प्रभाव व उनका उपयोग: हेल्थ प्रॉब्लम्स के लिए बेस्ट हैं ये टॉप 10 मंत्र (Healing Mantras: 10 Powerful Mantras For Good Health And Different Diseases)

ध्यान दें कि सूर्य ग्रहण अवधि तक भोजन व पानी के समस्त पदार्थो में तुलसी के पत्ते अवश्य डालें.

ग्रहण में क्या करें, क्या न करें…

सूर्य ग्रहण के दौरान भगवान सूर्य का जाप करें
ओम घृणि सूर्य आदित्य नमः

आदित्याय विद्ममहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात् 11000 जप अवश्य करें.
चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फलित होता है. श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का आठ हज़ार जप करने के पश्चात ग्रहण शुद्धि होने पर उस घृत को पी लें. ऐसा करने से वह मेधा (धारणशक्ति), कवित्व शक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है.

सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुन्तुद नरक में वास करता है.

सर्य ग्रहण में ग्रहण चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (9) घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए.
बुज़ुर्ग, बच्चे और मरीज़ डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं.

ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते. पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए.

ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए

ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए. स्त्रियां सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं.

ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए.

ग्रहण काल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे दे देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए.

ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए. ग्रहण के स्नान में गरम जल की अपेक्षा ठंडा जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा ज़मीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है.

ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, ज़रूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है.

ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए. बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए. ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन- ये सब कार्य वर्जित हैं.

ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए.

ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है. गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए.

तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किन्तु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए.

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भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं-
‘सामान्य दिन से चन्द्र ग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है. यदि गंगाजल पास में हो तो चन्द्र ग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्य ग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है.’

ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है

ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है. (स्कन्द पुराण)

भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए.(देवी भागवत)

अस्त के समय सूर्य और चन्द्रमा को रोगभय के कारण नहीं देखना चाहिए.

स्थान- ग्रहण प्रारम्भ व समाप्ति समय

अहमदाबाद- 4:38 से 6:06 तक
नई दिल्ली- 4:28 से 5:42 तक
सूरत- 4:43 से 6:07 तक
मुम्बई- 4:49 से 6:09 तक
पुणे- 4:51 से 6:06 तक
नागपुर- 4:49 से 5:42 तक
नाशिक- 4:47 से 6:04 तक
जोधपुर- 4:30 से 6:01 तक
लखनऊ- 4:36 से 5:29 तक
भोपाल- 4:42 से 5:47 तक
रायपुर- 4:50 से 5:32 तक
चंडीगढ़- 4:23 से 5:41 तक
रांची- 4:48 से 5:15 तक
पटना- 4:42 से 5:14 तक
कोलकाता- 4:41 से 5:04 तक
भुवनेश्वर- 4:56 से 5:16 तक
चेन्नई- 5:13 से 5:45 तक
बेंगलुरु- 5:12 से 5:56 तक
हैदराबाद- 4:58 से 5:48 तक
जम्मू- 4:17 से 5:47 तक

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Photo Courtesy: Freepik

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